Dhai Chaal

Dhai Chal

Dhai Chal

About the book:

सत्ता की हिस्सेदारी के लिए कुछ तबकों के बीच ठनी वर्चस्व की लड़ाई, जिनकी तरफ देश की आम जनता बड़ी उम्मीदों से ताकती रहती है। एक बलात्कार को राजनीति की बिसात बना देने वालों की कहानी, जिनसे लोग न्याय के लिए साथ की अपेक्षा रखते हैं। धर्म, जाति, मीडिया और राजनीति के नेक्सस की एक ऐसी आपराधिक कथा जो किसी काल्पनिक या दूर की दुनिया की बात नहीं; बल्कि हमारे आसपास रोज़ घट रही घटनाओं का कच्चा चिट्ठा है। छल-प्रपंच और निजी सम्बन्धों के भीतर चल रहे राजनीतिक समीकरणों की एक ऐसी कथा जो चौंकाती तो है, लेकिन बेभरोसे की नहीं लगती। ‘ढाई चाल’ उपन्यास इस समय की राजनीति की रोमांचक कथा है। राजनीति जो घर और रिश्तों में जड़ें पसार चुकी है, राजनीति जो हमारे समय का सबसे बड़ा मनोरंजन है, राजनीति जो कि अब थ्रिलर है। यही कारण है साजिश और सस्पेंस—किताब के आख़िरी पन्ने तक पाठक को साथ बनाए रखते हैं।

Storyline

हजारा में एक 17 वर्षीय लड़की के बलात्कार का आरोप एक मंत्री पर है। पुलिस जाँच में मंत्री निर्दोष है, लड़की का परिवार सत्ता द्वारा टॉर्चर किया जा रहा है। प्रदेश का मीडिया दबाव में चुप है तो राष्ट्रीय मीडिया को इसमें बहुत TRP नहीं दिख रही। प्रदेश की मुख्यमंत्री महिला है किंतु मंत्री को बचाना उसकी राजनीतिक मजबूरी है। धर्म की राजनीति, सत्ता का समीकरण, लव जिहाद, सब इस कहानी का हिस्सा बन जाते हैं। मयूर भारद्वाज अब पत्रकार है और उसने सबके खिलाफ जाकर पीड़िता को न्याय दिलाने की ठानी है लेकिन यह मामला मकड़ी के जाले की तरह फैलता जा रहा है और हर पक्ष इसमें फँस चुका है। क्या मयूर इसमें से निकलेगा और पीड़िता को न्याय दिलाएगा?

For the share of power, there is a battle of supremacy between some sections, towards which the common people of the country keep looking with great hopes. The story of those from whom people expect support for justice, they made crime like rape a political game. The nexus of religion, caste, media and politics in a crime story that is not out of a fantasy or distant world; Rather, it is a raw script of the events happening around us everyday. Such a story of deceit and political equations going on within personal relationships, which is shocking, but does not seem to be untrustworthy. The novel ‘Dhai Chaal’ is an exciting story of the politics of this time. Politics that has taken root in our homes and relationships, Politics that is the biggest entertainment of our times, Politics that is now thriller. This is the reason the plot and suspense keep the reader together till the last page of the book.

Storyline

A minister is accused of raping a 17-year-old girl in Hazara. The minister is innocent in the police investigation, the girl’s family is being tortured by the authorities. The local media is silent under pressure, and the national media is not finding any TRP merit in it. The Chief Minister of the state is a woman but her political compulsions are bigger then delivering justice. Politics of religion, equation of power, love jihad, all become part of this story. Mayur Bhardwaj is now a journalist and he has decided to go against everyone and fight for the victim, but this case is spreading like a spider’s web and every party is trapped in it. Will Mayur come out of it and bring justice to the victim?

Reviews:

मौजूदा वक्त का दिलचस्प पॉलिटिकल थ्रिलर, जिसने बताई ‘जनता की कीमत’!

– आज तक

यूँ तो ‘हज़ारा’ एक काल्पनिक जगह है पर उपन्यास में सत्ता के गठजोड़ों में शामिल राजधानी से लेकर छोटे गाँव-कस्बों को जिस तरह से दिखाया गया है उसने इस काल्पनिक जगह के भारत के किसी भी असल कस्बे जैसा जिंदा बना दिया है, जिसके बीचो-बीच राजनीति अपनी चालें चलती रहती है, तिकड़म भिड़ाती रहती है|

– आउट्लुक

थ्री-पी के गठजोड़ के सच को बयां करती है ढाई चाल।

– प्रभात खबर

ढाई चाल इस तरह सरल और सहज भाषा में लिखी गई है जैसे लेखक बातचीत में किस्सा सुना रहे हैं। यह किताब उन्हें पढ़नी चाहिये जो सरल और सहज भाषा में राजनीतिक ताना-बाना पढ़ना चाहते हैं।

– जयप्रकाश पांडे, साहित्य तक

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